दिल्ली में पावर सेक्टर की राष्ट्रीय स्तर की बैठक में मच गई थी खलबली
- प्रदेश के ऊर्जा मंत्री, चेयरमैन, दक्षिणांचल के एमडी भी बैठक में कर रहे थे प्रतिभागिता
- उच्चाधिकारियों ने मथुरा के बिजली अधिकारियों को ले लिया था रडार पर
- जिम्मेदार अभियंता से मांगा गया स्पष्टीकरण, अपनी गर्दन बचाने को अधीनस्थ के पाले में गेंद फेंकने की तैयारी
मथुरा: गुरुवार यानी 19 मार्च की शाम को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु जब वृंदावन में इस्कॉन मंदिर में प्रवेश कर रही थीं, तभी पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति ठप हो गई थी। पावर कारपोरेशन का तो ‘फ्यूज’ ही उड़ गया था। उस दौरान दिल्ली में पावर सेक्टर की राष्ट्रीय बैठक चल रही थी, बैठक में प्रतिभागिता कर रहे कारपोरेशन के उच्चाधिकारियों में खलबली मच गई थी। खैर, करीब आधा घंटे बाद सप्लाई चालू हो गई थी लेकिन, इस घटना ने मथुरा के बिजली आपूर्ति सिस्टम पर सवाल खड़ा कर दिया। जिम्मेदार अभियंता से जवाब मांगा गया है। अपनी गर्दन बचाने के लिए अधीनस्थ के पाले में गेंद फेंकने की तैयारी है।

घटना के अगले दिन अधिशासी अभियंता अनिल कपिल का स्पष्टीकरण अखबारों में पढ़ने को मिला जिसमें वो सफाई दे रहे हैं कि तेज हवा और बरसात के कारण पेड़ की डाली क्षेत्रीय फीडर पर गिर गई थी। त्वरित कार्रवाई करते हुए उस फीडर को अलग करते हुए सप्लाई चालू करा दी गई। ऐसे में सवाल बिजली विभाग की तैयारी का है। राष्ट्रपति के आगमन की सूचना मिलते ही समूचा प्रशासन सघन तैयारी में जुट गया था। राष्ट्रपति के आगमन-प्रस्थान वाले मार्ग दुरुस्त कर दिए गए। साफ-सफाई और रंग-रोगन करके पूरे मार्ग को चमका दिया गया। प्रशासनिक अमला दिन-रात जुटा रहा। वरिष्ठ अधिकारी निरंतर तैयारी की समीक्षा भ्रमण करके करते रहे। मगर, बिजली विभाग ने क्या किया? मौसम का पूर्वानुमान तो पहले ही हो गया था, तो बिजली विभाग ने उस क्षेत्र के फीडर को पेड की डालियों से बचाने के लिए क्या इंतजाम किए थे? देश के प्रथम नागरिक के आगमन पर भी तैयारी के नाम पर कागजी खानापूरी क्यों की गई? मथुरा पदस्थ वरिष्ठ अधिकारियों ने इस तैयारी की क्या मानीटरिंग की? इन अधिकारियों ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को अंधेरे में क्यों रखा?

गुरुवार को जब ये घटना हुई तो पावर कारपोरेशन में खलबली मचना लाजिमी था। ऊर्जा मंत्री, चेयरमैन और दक्षिणांचल के एमडी दिल्ली बैठक में प्रतिभागिता कर रहे थे। आनन-फानन जिम्मेदार अधिकारियों को रडार पर लिया गया। कैसे भी जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति सामान्य करने की हिदायत दी गई। अभियंता ने फोन पर अपनी मौखिक सफाई भी दे दी लेकिन, अब लिखित में स्पष्टीकरण मांगा गया है। सूत्र बताते हैं कि इस मामले को उच्चाधिकारियों ने बहुत गंभीरता से लिया है और इस बेपरवाही की सजा तो जरूर मिलेगी। वो इसलिए भी कि इसी वृंदावन में बिजली सुदृढीकरण के लिए पिछले वर्ष जुलाई में ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा करोड़ों के कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास कर चुके हैं। इनमें वृंदावन में जर्जर लाइनों को बदलने, भूमिगत लाइन बिछाने आदि का भी प्रविधान शामिल था।

राष्ट्रपति का कार्यक्रम संपन्न होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत की सांस ली थी। कह रहे थे कि वैसे तो सब बढ़िया रहा लेकिन, बिजली विभाग ने एक धब्बा लगवा दिया। जब-जब भी राष्ट्रपति के इस कार्यक्रम का जिक्र होगा, तब तब बिजली विभाग की लापरवाही याद की जाएगी। मथुरा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बहुत गंभीर हैं। यहां की विकास योजनाओं के लिए सरकार का खजाना हमेशा खुला रहता है। विकास और बेहतरी के लिए मथुरा तो मुख्यमंत्री की प्राथमिकता पर रहा है।


